उत्तराखंड (देहरादून) 23 जनवरी 2026: “अन्याय और गलत से समझौता करने से बड़ा कोई अपराध नहीं है” नेताजी सुभाष चंद्र बोस का यह कथन आज भी जागरूक नागरिकों के लिए प्रेरणा स्रोत है जो उत्तराखंड की सरकारी व्यवस्थाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार, अन्याय,शोषण,उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।राज्य के पर्यावरण को पहुंचने वाले गंभीर खतरों से जिम्मेदारों को आगाह करने वाले पर्यावरण प्रेमी भी देशभक्त हैं जो भावी पीढ़ियों के जीवन को विनाश से बचाने के लिए आवाज बुलंद करते हुए नेताजी के बताएं मार्ग पर ही अग्रसर हैं।ये विचार आजाद हिंद फौज के योद्धा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129 सी जयंती पर,गांधी पार्क में नेताजी की प्रतिमा के समक्ष संयुक्त नागरिक संगठन द्वारा आयोजित श्रद्धासुमन कार्यक्रम में अभिव्यक्त किए गए। इस अवसर पर देशद्रोह की सजा में फांसी के तख्तों पर झूलने वाले जौनसार भाबर और देहरादून में जन्मे आजाद हिंद फौज के मेजर दुर्गामल्ल तथा शहीद वीर केसरी चंद की प्रतिमाओं पर भी श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।वक्ताओं में उत्तराखंड केंद्रीय पेंशनर्स वेलफेयर संगठन के स्वामी एस चंद्रा, सरदार हरविंदर सिंह काला,रविंद्र दत्त सेमवाल,आंदोलनकारी मंच के मोहन सिंह खत्री,सांख्य योग के डॉक्टर मुकुल शर्मा,सीव्यूसेवा ट्रस्ट के डॉ.महावीर बर्थवाल,अशोक भट्ट,संयुक्त नागरिक संगठन के सुशील त्यागी,अवधेश शर्मा, धाद के मेजर एमएस रावत,स्वतंत्रता सेनानी परिवार के एसपी चौहान, जगदीश घिल्डियाल सहित प्रकाश नागिया,विकास त्यागी, जगदीश कुकरेती आदि थे।
