उत्तराखंड (देहरादून) 14 दिसंबर 2025: उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कहा कि महिलाओं का वास्तविक सशक्तीकरण तभी संभव है जब वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र हों। उन्होंने कहा कि जब तक महिलाओं को रोजगार, उद्यमिता और निर्णय प्रक्रिया में समान अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक समावेशी विकास की कल्पना अधूरी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जनसंचार और पब्लिक रिलेशन आज देश और प्रदेश के विकास का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है, जिसके जरिए सरकार और जनता के बीच मजबूत संवाद स्थापित किया जा सकता हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी रविवार को सहस्रधारा रोड स्थित होटल द एमराल्ड ग्रैंड में आयोजित पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई) के 47वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं। उन्होंने पीआरएसआई की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था सरकार की नीतियों, योजनाओं और विकास कार्यों को आम जनता तक पहुंचाने में एक सशक्त सेतु का कार्य कर रही है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज का युग सूचना और संवाद का है। जनसंचार के माध्यम से अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जा सकती है। उन्होंने इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पीआर और कम्युनिकेशन जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के लिए अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि पीआर इंडस्ट्री का आकार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ-साथ यह चुनौती भी है कि सूचना विश्वसनीय, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचे। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने पीआरएसआई के माध्यम से जनसंचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभिन्न एजेंसियों, संस्थानों और व्यक्तियों को सम्मानित भी किया।
इस अवसर पर पीआरएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत पाठक ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए। सम्मेलन के दूसरे दिन गेल के सीईओ संदीप गुप्ता, स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव मुख्यमंत्री एवं एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी, प्रो. दुर्गेश पंत, संयुक्त निदेशक सूचना नितिन उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार अनुपम त्रिवेदी, डॉ. हिमांशु शेखर, सीआईएमएस के चेयरमैन एडवोकेट ललित जोशी, डॉ. सुरभि दहिया, समिदा देवी, मेजर अतुल देव, सी. रविंद्र रेड्डी सहित देशभर से आए पीआर और मीडिया जगत के अनेक प्रतिष्ठित प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
