उत्तराखंड (देहरादून) 29 मार्च 2026: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश की पहली ‘राजस्व लोक अदालत’ की शुरुआत की। ‘सरलीकरण, समाधान और निस्तारण’ के मंत्र के साथ शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य सालों से लंबित पड़े 50 हजार से अधिक राजस्व मामलों को तेजी से हल करना है।
‘न्याय आपके द्वार’: एक साथ 210 स्थानों पर सुनवाई
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी 13 जनपदों में 210 स्थानों पर एक साथ इन अदालतों का आयोजन किया जा रहा है।
त्वरित समाधान: पहले चरण में ही लगभग 6,933 मामलों का मौके पर निस्तारण किया जाएगा। केवल जमीन ही नहीं: भूमि विवादों के अलावा आबकारी, स्टाम्प, बिजली अधिनियम, रेंट कंट्रोल और वरिष्ठ नागरिक अधिनियम से जुड़े मामलों की भी पारदर्शी सुनवाई होगी।
‘डिजिटल इंडिया’ का दम: अब ऑनलाइन दर्ज होंगे केस
प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए सरकार ने ‘Revenue Court Case Management System’ पोर्टल लॉन्च किया है।
सुविधा: अब नागरिक घर बैठे ही अपने प्रकरण ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे।
पारदर्शिता: पोर्टल के माध्यम से केस की स्थिति और सुनवाई की तारीखों की जानकारी भी उंगलियों पर होगी।
मुख्यमंत्री ने राजस्व अधिकारियों को समयबद्ध काम करने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं:
विरासत का नामांतरण: भू-स्वामी की मृत्यु के बाद ‘तेहरवीं/पीपलपानी’ तक वारिसों के नाम खतौनी दर्ज कर परिवार को सौंप दी जाए।
एक माह की डेडलाइन: विवादित भूमि की पैमाइश और कब्जों से संबंधित मामलों को 30 दिन के भीतर निपटाने के आदेश दिए गए हैं।
बैकलॉग खत्म होगा: मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने सभी जिलाधिकारियों को युद्ध स्तर पर पेंडिंग केस खत्म करने को कहा है।
