उत्तराखंड (देहरादून) 14 अगस्त 2025: दून सिटीजन फोरम व एसडीसी फाउंडेशन ने प्रदेश सरकार से उत्तरकाशी की धराली आपदा और सोमवार को भारी वर्षा से देहरादून में हुई बर्बादी से सीख लेते हुए 26 किलोमीटर के प्रस्तावित रिस्पना बिंदाल एलिवेटेड कारिडोर पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने कहा कि धराली का सबक है कि नदियों के ऊपर किसी किस्म का निर्माण नहीं होना चाहिए।
फोरम ने कहा कि सोमवार को देहरादून शहर के अलग-अलग हिस्सों में बरसात के रौद्र रूप ने सवालिया निशान लगा दिया है। क्लाइमेट क्राइसिस और एक्सट्रीम वैदर इवेंट के इस घातक दौर में क्या देहरादून शहर को इस परियोजना के साथ आगे बढ़ना चाहिए। शहर के लिए ट्रैफिक समस्या है लेकिन उसका समाधान पब्लिक ट्रांसपोर्ट, वाकिंग, साइकलिंग व अन्य माध्यम से निकलना चाहिए। लाखों टन सीमेंट और कंक्रीट से नदियों में पाट कर आगे नहीं बढ़ना न चाहिए। फोरम से जुड़े फ्लोरेंस पांधी, परमजीत कक्कड़, अनूप नौटियाल, रितु चटर्जी, हिमांशु अवस्थी, रिकू सिंह, अक्षत चौहान, महाबीर सिंह रावत, मौसमी भट्टाचार्य, कैप्टन वाई भट्टाचार्य, लेफ्टिनेंट कर्नल सनी बख्शी, सुनील नेहरू, अजय दयाल, सारा दयाल, अलका मदान, भारती पी. जैन, रमन्ना कुमार, पूर्णिमा वर्मा, ध्रुव बत्रा, मनुज अग्रवाल, राकेश कपूर, अक्षय अग्रवाल और एसएस रसाइली ने कहा कि 6200 करोड़ की परियोजना देहरादून के प्राकृतिक परिदृश्य को व्यापक रूम से प्रभावित करेगी। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट तक सार्वजनिक रूम से उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने संकल्पना और योजना प्रक्रिया में नागरिकों की अनुपस्थिति को लेकर तीखी आपत्ति दर्ज की। सहस्त्रधारा रोड जैसी हाल की सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं के प्रभाव का आज तक अध्ययन नहीं किया गया है। सरकार नदी पुनर्जीवन की बात करती है, तो फिर बड़ी निर्माण परियोजना कैसे इन नाजुक नदी क्षेत्रों में उचित मानी जा सकती है। ऐसी परियोजनाएं जैव विविधता को नुकसान पहुंचाती हैं और जल प्रवाह को बदल देती हैं। एक ओर पर्यटकों के पंजीकरण से उनकी संख्या नियंत्रित करने की बात हो रही है और दूसरी ओर मसूरी के लिए 5-6 नए मार्ग, रोपवे और एलिवेटेड करिडोर जैसे प्रोजेक्ट बनाए जा रहे हैं। किसी भी शहर के लिए निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में वहां के लोग होने चाहिए। इतनी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं बिना जन संवाद, सामुदायिक भागीदारी या स्वतंत्र मूल्यांकन के नहीं चलाई जानी चाहिए। फोरम आने वाले समय में और बैठकें तथा जनजागरूकता सत्र आयोजित करेगा।
