उत्तराखंड (देवप्रयाग) 15 अप्रैल 2025: बैसाखी संक्रांति के साथ ही देवप्रयाग क्षेत्र में पारंपरिक थौल मेलों की शुरुआत हो गई है। ये मेले पूरे बैसाख महीने भर अलग-अलग गांवों और धार्मिक स्थलों पर आयोजित किए जाते हैं। थौल मेलों को लेकर क्षेत्र में खासा उत्साह है। दूर-दराज से लोग इन आयोजनों में शामिल होने पहुंच रहे हैं। स्थानीय परंपराओं के अनुसार, मेलों की शुरुआत एक गते को व्यासघाट से होती है। दो गते को डांडा नागराज और बमणा, तीन गते को माडा मड़ियारी, चार गते को नैखरी चंद्रबदनी, सबदरखाल और खरसड़ी में मेला लगता है। पांच गते को दनाड़ा, छह गते को भरपूर और माल्डा, सात गते को भदनी और बरगुरुदेव, आठ गते को हिसरियाखाल और खड़किडाली, नौ गते को पूजारगांव, तथा दस गते को डांडापाणी और चमराड़ा देवी मंदिर में मेला आयोजित किया जाता है। मेलों की श्रृंखला का समापन तीस गते को तुणगी गांव में आयोजित होने वाले अन्नपूर्णा थौल के साथ होता है। विशेष बात यह है कि उत्तराखंड में बलि प्रथा को समाप्त करने की शुरुआत भी सबसे पहले यहीं से हुई थी।
