विपक्षी दलों और जनसंगठनों ने प्रेसवार्ता कर उठाए सवाल
उउत्तराखंड (देहरादून) 18 जनवरी 2025: विपक्षी दलों और जन संगठनों ने भाजपा सरकार को मलिन बस्तियों के सवाल पर घेरा। वक्ताओं ने कहा कि एक तरफ सत्ताधारी पार्टी और उनके प्रत्याशी हर क्षेत्र में जाकर कह रहे हैं कि तीन साल तक बस्तियों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी व नियमितीकरण किया जायेगा और दुसरी तरफ सरकार को पता है कि 16 दिसंबर को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने बेदखली पर रोक लगाने वाले अध्यादेश को मानने से इंकार कर दिया है।
प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में संगठनों ने कहा कि एनजीटी का यह आदेश विधि विरुद्ध और गैर संवैधानिक है। लेकिन सरकार ने इसके खिलाफ एक भी कदम नहीं उठाया है। लगता है कि सरकार स्वयं अपने एजेंट्स के माध्यम से कोट्टों में विवाद खड़े करवाती है और कोर्ट/ एनजीटी के समक्ष सरकार जान बुझकर लचर पैरवी कर गरीबों की बेदखली के लिए कोर्ट के आदेशों को हथियार बनाना चाहती है।
कहा कि नवंबर 2016 को लाए गये कानुन के बावजूद आठ वर्षों के पश्चात भी इस दिशा में सरकार ने कोई व्यापक सर्वेक्षण न तो कराया गया है, न ही सरकार के पास बस्तियों में निवासरत परिवारों द्वारा क्षेत्र के संबंध में कोई आधिकारिक आंकड़ा है। प्रस वार्ता में राज्य सचिव अशोक शर्मा, चेतना आंदोलन के शंकर गोपालय, जिला सचिव लेखराज और हरी कुमार, समाजवादी पार्टी के,महानगर सचिव अतुल शर्मा, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव नरेश नौडियाल आदि थे।
