उत्तराखंड (देहरादून) 28 सितंबर 2024: वैदिक पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि की शुरूआत हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है. इस साल 3 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि आरंभ हो रही है, जो 11 अक्तूबर को समाप्त होगी. नवरात्रि के दौरान 9 दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है ।
वैसे तो साल में 4 बार नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है, जिसमें से 2 गुप्त नवरात्रि भी शामिल है. बाकी की दो चैत्र और आश्विन माह में मनाई जाती है. आश्विन माह में आने वाली नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहा जाता है. वैदिक पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि की शुरूआत हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। इस साल 3 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि आरंभ हो रही है, जो 11 अक्तूबर को समाप्त होगी. नवरात्रि के दौरान 9 दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है. हर दिन देवी मां के एक अलग रूप की पूजा की जाती है, और भक्त व्रत रखकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते है। इस पर्व के दौरान लोग अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लेते हैं और बुरी आदतों या नकारात्मकता को छोड़ने की कोशिश करते हैं. वहीं नवरात्रियों में कलश स्थापना का भी विशेष महत्व है।
भम तिवारी ने बताया कि नवरात्रि में कलश स्थापना एक महत्वपूर्ण धार्मिक क्रिया है, जिसे विशेष विधि से किया जाता है. सबसे पहले, एक स्वच्छ स्थान का चयन करें और वहां एक लकड़ी की चौकी रखें. फिर, उस चौकी पर एक कलश रखें और उसे गंगाजल से भरें. कलश के मुंह पर आम के पत्ते रखें और उसके ऊपर नारियल रखें. इसके बाद, कलश के सामने एक दीया जलाएं और देवी मां का चित्र या मूर्ति स्थापित करें. फिर, देवी दुर्गा की पूजा करें, मंत्र जाप करें और अपनी मनोकामनाएं प्रस्तुत करें. इस प्रकार, कलश स्थापना से सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का संचार होता है।
