उत्तराखंड (मसूरी)25 अगस्त 2024: पहाड़ों की रानी मसूरी के समीप प्रमुख पर्यटक स्थल देवलसारी स्थित भोलेनाथ की थाती पर बने प्राचीन मंदिर में पारंपरिक बाध्य यंत्रों की थाप व वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मंदिर के पुजारी विजय गौड़ ने ग्रामीणों की मौजूदगी और तिरकाल दर्शीनीलकंठ के जयघोष के साथ मंदिर के गर्भग्रह में हरियाली पर्व का शुभारम्भ कर दिया है।
शनिवार को भगवान शंकर की थाती देवलसारी के प्राचीन मंदिर में भाद्रपद के माह में पड़ने वाली हरियाली का शुभारम्भ हो गया है। जिसको लेकर स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल हैं।स्थानीय निवासी आचार्य रामेश्वर प्रसाद कोठारी, हकमसिंह राणा, प्रेम सिंह राणा, चन्द्र सिंह रावत ने बताया कि 31 अगस्त को रात्रि जागरण कागल रात्रा व एक सितम्बर को हरियाली काटी जायेगी। जिसे श्रद्धाल्ओं को भोलेनाथ के प्रसाद के रूप में वितरित की जाएगी।उन्होंने बताया कि देवलसारी स्थित भगवान कोणेश्वरमहादेव के प्रचीन मंदिर का महत्व खुद में अलग है।
मान्यता है कि आज से वर्षों पूर्व देवलसारी में बांगसील निवासियों की चवारी की खेती हुआ करती थी। जगह की रमणीकता को लेकर भगवान भोलेनाथ ने एक साधु का भेष धारण कर ग्रामीण से एक पग जगह मांगने की गुजारिश की, लेकिन जगह न मिलने पर क्रोधित होकर त्रिकालदर्शी ने ग्रामीणों की चवारी की खेती को देवारी में तब्दील कर लिंग की उत्पत्ति कर दी।
जिसके कारण तब से ही देवलसारी में भगवान शंकर को कोने वर महादेव के नाम से पूजा जाता है।उन्होंने बताया कि एक साल देवलसारी और एक साल ग्राम बंगसील में हरियाली डालने की वर्षों पुरानी प्रथा आज भी कायम है। बताया जाता है कि मंदिर के गर्भगृह में आज भी भगवान शंकर विराजमान हैं और मंदिर परिक्रमा करने आधी रात्रि के समय परशेर आया करता है जो परिक्रमा करके गायब हो जाता है। वही हरियाली के दिनों में आस पड़ोस व दूरदराज के सैकड़ों लोग मंदिर पहंचकर मन्नतें मांगते हैं, जिनकी मुराद कोणेश्वर महादेव पूरा करते हैं।
