बे-गैरत विधायकों को किस एवज में दे रही सरकार वेतन, भत्ते- पेंशन
उत्तराखंड (विकासनगर) 03 जुलाई 2026: जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि दुनिया का यह अजूबा मामला है कि एक विधायक को 50,000 रुपये प्रतिमाह वेतन, तथा रिटायर होने पर/कार्यकाल समाप्त होने पर ₹60,000 पेंशन का प्रावधान है। वेतन कम और पेंशन ज्यादा वाली स्कीम कर्मचारियों के मामले में भी लागू होनी चाहिए थी। वर्तमान में विधायक को ₹50,000 वेतन1,50,000 रुपये निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, जन सेवा कार्य हेतु भत्ता 1,35,000, डीजल/पेट्रोल खर्च ₹30,000 तथा 57,000 रुपए स्टाफ आदि का खर्च मिलता है तथा इसी प्रकार पूर्व विधायक को 60,000 हजार रुपए प्रति माह पेंशन प्रथम वर्ष के लिए तथा प्रत्येक वर्ष पूर्ण होने पर ₹3,000 अतिरिक्त एवं आयु स्लैब पर अतिरिक्त पेंशन मिलती है इसके अतिरिक्त ₹26000 प्रतिमाह डीजल/पेट्रोल खर्च मिलता है। वर्तमान व पूर्व विधायकों एवं उनके परिवार का स्वास्थ्य संबंधित ठेका भी सरकार ने आजीवन ले रखा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जो प्रदेश दिवालिया होने के कगार पर हो,उस प्रदेश में इन बे-गैरत व गैर जिम्मेदार विधायकों को किस बात का वेतन, भत्ते, पेंशन आदि दी जा रही है। क्या ये विधायक सरकारी सेवक हैं। क्या पैरामिलिट्री के जवानों से ज्यादा लड़ाकू हैं। जो कर्मचारी 30-35 साल अपना जीवन नौकरी में खपा देता है, क्या उनसे ज्यादा काबिल हैं ये। आखिर ये विधायक जनता को दे क्या रहे हैं। नेगी ने कहा कि बड़े दुख की बात है कि 30-35 साल सरकारी नौकरी करने के बाद भी कर्मचारियों को पेंशन की सुविधा नहीं तो इन विधायकों को क्यों। प्रदेश का कर्मचारी व आमजन कराह रहा है, लेकिन इन निकम्में विधायकों को उनकी आवाज सुनाई नहीं दे रही। मोर्चा ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि इन गैर लाइसेंसी ठेकेदार रूपी विधायकों की तर्ज पर वेतन कम और पेंशन ज्यादा वाला फार्मूला कर्मचारियों के मामले में भी लागू करें।
