उत्तराखंड (नरेंद्रनगर) 9 जुलाई 2025: धान की रोपाई हो या मंडुआ/झंगोरा की गुड़ाई इन काश्तकारी कार्यक्रमों को कई दशक पूर्व गांव में रह रहे बाजगियों के ढोल दमाऊ की थाप पर ग्रामीण सामूहिक सहयोग के कार्यक्रमों के जरिए संपन्न कर लिया करते थे।
पट्टी दोगी के बुगाला गांव में धान रोपाई के ऐसे सामूहिक कार्यक्रम के आयोजन की भनक लगते ही आसपास के ग्रामीण भी बुगाला गांव पहुंच पड़े। ढोल दमाऊं की संगीत मय थाप पर, प्रारंभ हुई धान रोपाई के इस सामूहिक कार्यक्रम को देख, जहां सभी लोग अभीभूत हो उठे। वहीं, इस सामूहिक कार्य ने पौराणिक धान रोपाई, मंडुवा व झंगोरे की गुड़ाई की बरसों बरसों पुरानी याद को ताजा कर बीते दिनों की याद दिला दी।
दरअसल में पौराणिक परंपराओं की रीति/रस्म समेटे यह भव्य आयोजन द हिमालयन ट्रस्ट की सहायता से पुनरुत्त्थान रूरल डेवलपमेंट एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी के माध्यम से आयोजित किया गया। इस संस्था में गांव के होनहार नौजवान दिलचस्पी के साथ कार्य करते हैं। धान रोपाई कार्यक्रम की शुरु आत हल, जुआ, मैंड़ा, ढोल दमाऊं व धान की पौध की गुच्छी पूजन व मिष्ठान वितरण के साथ किया गया। इस मौके पर भड्डू की दाल व कढ़ाई के भात का सभी को भोजन करवाया गया।
इस मौके पर सरोजनी देवी, ज्योति रयाल, विरेंद्र रयाल, गजेंद्र रयाल, भगवती रयाल, दिनेश रयाल, पंकज रयाल, नरेंद्र रयाल, संगीता देवी, अनिल रयाल, सरोजनी, जयंती रयाल, सहदेव रयाल, ममता रयाल, बंशीधर रयाल, नरेश रयाल, सरला देवी, जगदीश रतूड़ी, राजी देवी, देवेंद्री देवी, बस्सी, सुभाष रणाकोटी, सुमन पेटवाल, बीना उप्रेती, रजनीश उनियाल, विकास, अदिति, प्रवीण, कर्मयोगी विकास चंद्र रयाल, पुष्पा देवी, प्रमोद रयाल, सुरेंद्र रयाल, मनोज रयाल, संजय रयाल आदि मौजूद थे ।
