उत्तराखंड (हल्द्वानी) 4 जुलाई 2025: नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने उत्तराखण्ड सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार का त्रिस्तरीय चुनावों को सात महीने तक टालने के बाद अब मानसून में करने का निर्णय प्रदेश की जनता की जान जोखिम में डालने जैसा है।
आर्य ने कहा कि इस समय उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण नदियां और नाले उफान पर है और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में भूस्खलन और बादल फटने की खबरे आ रही है। इससे सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे में पंचायत चुनावों के मामले में सरकार का निर्णय अपरिपक्व साबित हो रहा है।
उन्होंने कहा पहले चरण की बरसात में ही प्रदेश के हर इलाके का जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया, किसी भी इलाके में सड़क मार्ग – सुरक्षित नहीं हैं और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कुछ लोगों ने आपदा के कहर में जान भी गंवाई है। चुनाव प्रक्रिया के लिए तय समय में उत्तराखण्ड में मानसून चरम पर होता है। ऐसे में स्थिति की भयावहता की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कांग्रेस पिछले साल अक्टूबर के महीने से समय पर पंचायत चुनावों को करवाने की मांग कर रही थी, लेकिन सरकार की मंशा हर हाल में पंचायत चुनाव टोलना था। सरकार ने इसी नियत से एक बार छह महीनों के लिए पंचायतों में प्रशासक बैठाए फिर यह कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार मई के महीने अध्यादेश के द्वारा पंचायतों में प्रशासकों का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाना चाहती थी।
आर्य ने आशंका व्यक्त की कि सरकार और भाजपा बरसात का लाभ लेकर चुनावों को अपने पक्ष में कर सकती है उसके लिए सरकार हरिद्वार के पंचायत चुनावों की तरह धन बल, बाहुबल, दुर्दात अधिकारियों और सरकारी मशीनरी का भी प्रयोग कर सकती है।
