उत्तराखंड (देहरादून) 30 अक्टूबर 2024: धनतेरस से पांच दिवसीय दीपांवली पर्व की शुरुआत हो चुकी है। धनतेरस पर सनातन परंपरा में धन के स्वामी भगवान कु्बर की पूजा का महत्व बताया गया है। योगनगरी में धनतेरस पर्व पर बाजारों में खरीदारी के लिए गहमागहमी दिखाई दी। बाजारों में लोग जमकर खरीदारी करते नजर आएं।
त्योहार पर लोग अपने परिवार के साथ दीपावली पर लक्ष्मी पूजा के लिए बड़े उत्साह से खरीदारी करते नजर आए । कृष्ण पक्ष की कार्तिक त्रियोदशी पर धनवंतरि की पूजा का भी विधान है। धनतेरस पर बाजारों में चांदी सोने के आभूषण व वस्तुओं के साथ नए बर्तन खरीदने की भी परंपरा है। धनवंतरि को आयुर्वेद का जनक व विष्णु का अवतार माना गया है। इनका जन्म सागर मंथन से हुआ। धनवंतरि देव को भगवान विष्णु का रूप कहते हैं जिनकी चार भुजाएं हैं। ऊपर की दोनों भुजाओं में शंख और चक्रधारण किए हुए हैं। जबकि दो अन्य भुजाओं में से एक में औषधि तथा दुसरे में अमृत कलश लिए हुए हैं।
मृत्यु का भय समाप्त करने को जलाएं यम दीपक: ज्योतिष महंत मनोज गिरि ने बताया कि नरक चतुर्दशी पर यम देवता के लिए दीप प्रज्वलित करने की सनातनी परंपरा हैं। मान्यता है इससे अकाल मृंत्यु का भय समाप्त होता है। पंचांग के अनुसार, 30अक्तूबर शाम 5 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 2 मिनट का समय यम के नाम का दीपक जलाने के लिए सबसे उपयुक्त समय है। उन्होंने बताया दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा में जलाना चाहिए।
