उत्तराखंड (देहरादून) 21 अक्टूबर 2024: राष्ट्रीय कवि संगमं की तरफ से आयोजित मुशायरे में उर्दू और हिंदी को सगी बहनें कहा गया। संकल्प लिया गया कि लेखक, साहित्यकार और देश को बलशाली बनाने का काम करेंगे । राष्ट्र विरोधी तत्वों के खिलाफ जनजागृति अभियान भी चलाएंगे। सुभाषनगर स्थित एक समारोह स्थल में आयोजित मुशायरे में शायरों ने अपने दिल की बात कही। शायर अंबर खरबंदा ने कहा कि साहित्य जोड़ने का काम करता है। हम उर्दू और हिंदी को अपनी भाषा माननी चाहिए। उर्दू हमारी भाषा है। हमें इसके प्रति आत्मिक भाव रखना चाहिए। उर्दू देश को जोड़ने वाली भाषा है। इसका सुनहरा इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि देश और देशहित सबसे ऊपर है। इससे समझौता नहीं हो सकता। इस दौरान उन्होंने कलाम पेश किया, ‘मैंअपने दिल की कभी न कहता हूँ,उनकी हर बात सहता हूं-बेटे रहते थे मेरे घर में कभी, अब मैं बेटों के घर में रहता हू।
मुशायरे में राजेश आनंद, शौहर जलालाबादी, जसवीर सिंह,राजकुमार, मीरा नवेली, ईनाम रम्जी ने एक से बढ़कर एक कलाम सुनाए। इस मौके पर शायरों को सम्मानित भी किया गया।
