उत्तराखंड (देहरादून) 14 अगस्त 2024: सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापन मामले में योगगुरु रामदेव उनके सहयोगी बालकृष्ण और पतंजलि आयूर्वेद लिमिटेड की माफी स्वीकार करने के बाद उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही मंगलवार को बंद कर दी। योगगुरू रामदेव, बालकुष्ण और उनकी कंपनी की ओर से अधिवक्ता गौतम तालुकदार ने कहा अदालत ने रामदेव और बालकृष्ण पतंजलि आयुर्वेदलिमिटेड शपथपत्रों के आधार पर अवमानना कार्यवाही बंद कर दी है। न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसनुद्दीन अमानुल्ला की पीठ ने मामले में रामदेव,बालकृष्ण ओर पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को जारी अवमाननानोटिस पर 14 मई को अपना आदेश सुरक्षित रखा था।
सुप्रीम कोर्ट आईएमए द्वारा दायर एक योचिका पर सुनवाई कर रहा था। जिसमें कोविड टीकाकरण अभियान और आधुनिक चिकित्सा पद्धति के खिलाफ बदनाम करने वाला अभियाने चलाने का आरोप लगाया गया था।
न्यायालय ने 27 फरवरी को पतंजलि आयुर्वेद और उसके प्रबंध निदेशक बालकृष्ण को नोटिस जारी कर पूछा था कि कंपनी के उत्पादों और उनके औषधीय प्रभावों का विज्ञापन करने के बारे में पहले अदालत में दिए गए कपनी के शपथ पत्र का प्रथम दृष्टया उल्लंघन करने के लिए उनके खिलाफ क्यों न अवमानना कार्यवाही शुरू की जाए। शीर्ष अदालत ने 19 मार्च को कहा था कि रामदेव को कारण बताओ नोटिस जारी करना उचित समझा गया। क्योंकि पतंजलि द्वारा जारी विज्ञापन उनके द्वारा समर्थन को दर्शाता है, जो 21 नवम्बर 2023 को अदालतको दिए गए वचन के विपरीत है।
