उत्तराखंड (रुद्रप्रयाग) 12 अगस्त 2024: केदारनाथ धाम से लेकर रुद्रप्रयाग तक लगातार बािश जारी है। पिछले एक सप्ताह से हो रही बारिश से केदारघाटी की पहाड़ियां दूटने लगी हैं। रविवार दोपहर केदारनाथ पैदल मार्ग के भीमबली के ठीक सामने की पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूट गया जिससे मन्दाकिनी में झील जैसी स्थिति बन गई।
बीते 31 जुलाई की रात से लगातार केदारनाथ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हो रहा है। जिस कारण केदार घाटी की जनता डरी और सहमी हुई है। रविवार अपराहन बाद केदारनाथ पैदल मार्ग के भीमबली के
मन्दाकिनी नदी में झील बना दी। बाद में
धीरे-धीरे पानी निकलता गया तो लोगों धीरे- धीरे निकलता गया पानी,की सांस में सांस आई।
पर्यावरण विशेषज्ञ देव राषघवेंद्र बद्री ने कहा कि पर्यावरणविद कई सालों से चेता रहे हैं कि हिमालय बहुत ही नाजुक है और हम 2013 की आपदा से सबक नही ले पाए है। सरकार को हिमालय के लिए अलग नीति बनाने की जरूरत है।केदारनाथ धाम में निर्माण कार्य भी अधिक नहीं होना चाहिए। केदारनाथ धाम को आथिकी का जरिया ना बनाया जाए, इसके लिए सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर के रूप में कार्य करने की जरुरत है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नन्दनसिंह रजवार ने बताया कि 11 अगस्त को अपराह्न में भीमबली हेलीपैड के सामने नदीके पार पहाड़ी से भूस्खलन हुआ, जिससे मन्दाकिनी नदी में झील बन गई जो खुद ही धीरे-धीरे कम भी होने लगी। किसी प्रकार से कोई जान माल की कोई क्षति नहीं हुई। उन्होंने बताया कि गौरीकुंड से रुद्रप्रयाग तक अलटजारी कर दिया गया है । नदी किनारे रह रहेलोग सतर्क एवं अलर्ट रहे ।
