उत्तराखंड (देहरादून) 24 अक्टूबर 2026: देश में उभरती सुरक्षा चुनौतियों और आपात स्थितियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार आधुनिक सिविल डिफेंस नेटवर्क तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इसके तहत भारतीय सेना के साथ मिलकर सिविल डिफेंस नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा।
गृह मंत्रालय के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप भारतीय सेना के सहयोग से अपनी तरह की यह पहली संयुक्त प्रशिक्षण पहल शुरू की जा रही है। इसके पहले चरण में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 600 सिविल डिफेंस मास्टर ट्रेनर्स को तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव है। इन्हें नवंबर के दूसरे सप्ताह तक प्रशिक्षित करने की योजना है।
गृह मंत्रालय के अग्निशमन सेवा, सिविल डिफेंस एवं गृह रक्षक महानिदेशालय की ओर से भारतीय सेना के समन्वय में यह पहल की जा रही है। इसका उद्देश्य सिविल डिफेंस कर्मियों को आधुनिक सुरक्षा खतरों, शत्रुतापूर्ण परिस्थितियों और आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयार करना है। योजना पायलट चरण के परिणामों के आधार पर इस कार्यक्रम का अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी चरणबद्ध विस्तार करने की है।
प्रशिक्षण का पहला चरण 12 राज्यों में
पहले चरण में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, मेघालय, सिक्किम, असम, उत्तर प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु को शामिल किया गया है। प्रत्येक राज्य या केंद्र शासित प्रदेश से 50 मास्टर ट्रेनर्स का चयन प्रस्तावित है। इन्हें भारतीय सेना के नामित प्रशिक्षण संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मास्टर ट्रेनर 60 हजार स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करेंगे
पहल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका मास्टर ट्रेनर मॉडल है। विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद प्रत्येक मास्टर ट्रेनर अपने संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में 100 सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करेगा। इस प्रकार 600 मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से कुल 60,000 स्वयंसेवकों तक प्रशिक्षण पहुंचाने की क्षमता विकसित होगी।
तीन मॉड्यूल पर रहेगा जोर
1. खतरों के प्रति जागरूकता से जुड़े मॉड्यूल में आधुनिक और हाइब्रिड युद्ध, ड्रोन से संबंधित खतरे तथा हवाई हमलों के खतरे के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
2. बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों से संबंधित जागरूकता, घायलों के प्रबंधन आदि तकनीकी शामिल होगी।
3. आपातकालीन संचार, साइबर स्वच्छता, डिजिटल लचीलेपन, नागरिक-सैन्य समन्वय और आपातकालीन घटनाओं के प्रबंधन से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका मकसद संकट की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है।
