TET की अनिवार्यता समाप्त करने और पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर उत्तराखंड के प्राथमिक शिक्षकों ने दर्ज कराया विरोध
उत्तराखंड (देहरादून) 05 सितंबर 2026: उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ / उत्तराखंड राज्य प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन, देहरादून के जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह रावत के नेतृत्व में आज शिक्षक दिवस के अवसर पर जनपद देहरादून सहित उत्तराखंड के समस्त जनपदों एवं विकासखंडों में प्राथमिक शिक्षकों ने “शिक्षक दिवस” को “काला दिवस” के रूप में मनाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
प्राथमिक शिक्षकों ने काले वस्त्र धारण कर एवं बांह पर काली पट्टी बांधकर राज्य एवं केंद्र सरकार के प्रति अपना विरोध व्यक्त किया। शिक्षकों का कहना है कि TET की अनिवार्यता समाप्त करने, पुरानी पेंशन बहाल करने तथा शिक्षक हित से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण प्रकरणों पर सरकार द्वारा अपेक्षित निर्णय नहीं लिए जा रहे हैं और मामलों को लगातार लंबित रखा जा रहा है। इससे शिक्षक समुदाय में रोष, आक्रोश एवं असम्मान की भावना उत्पन्न होना स्वाभाविक है।
2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से तत्काल छूट देने की मांग
शिक्षकों की प्रमुख मांगों में 2010 से पूर्व विधिवत नियुक्त एवं कार्यरत सभी शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से तत्काल मुक्त किए जाने का प्रावधान करना शामिल है। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के भविष्य एवं उनकी नौकरी की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर विषय पर सरकार को शीघ्र ठोस निर्णय लेना चाहिए।
शिक्षक संघ ने केंद्र सरकार से भी आग्रह किया कि संसद में आवश्यक विधायी प्रावधान/अध्यादेश लाकर 2017 में RTE अधिनियम में किए गए संबंधित संशोधन को समाप्त करने की दिशा में पहल की जाए, ताकि उत्तराखंड सहित देशभर के शिक्षकों को नौकरी पर उत्पन्न हो रहे संकट से सुरक्षा मिल सके।
विशेष TET के विकल्प पर भी विचार करने का आग्रह
शिक्षकों ने TET के प्रकरण में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश की तर्ज पर विशेष TET परीक्षा के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है, ताकि सेवारत शिक्षकों के लिए व्यावहारिक एवं न्यायसंगत समाधान निकाला जा सके।
पुरानी पेंशन हूबहू लागू करने की मांग
शिक्षकों की दूसरी प्रमुख मांग नई पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पूर्ववत लागू करना है। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय तक सरकारी सेवा देने वाले कर्मचारियों को सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है।
“काले दिवस” के माध्यम से सरकार को संदेश में
जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि शिक्षक समाज राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिक्षक दिवस शिक्षकों के सम्मान का दिन है, लेकिन जब शिक्षक अपने सम्मान, सेवा सुरक्षा एवं भविष्य को लेकर चिंतित हों और उनकी न्यायोचित मांगों पर लगातार निर्णय टाले जाएं, तो विरोध दर्ज कराना आवश्यक हो जाता है।
उन्होंने कहा कि आज देहरादून जनपद सहित उत्तराखंड के समस्त जनपदों एवं विकासखंडों में काले परिधान एवं काली पट्टी के माध्यम से शिक्षकों ने शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया है। यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि शिक्षक हित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए है।
शिक्षक संघ ने राज्य एवं केंद्र सरकार से मांग की कि TET की अनिवार्यता, 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को छूट, विशेष TET के विकल्प तथा पुरानी पेंशन बहाली जैसे विषयों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेकर शिक्षक समुदाय की चिंताओं का समाधान किया जाए।
शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि यदि इन विषयों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं हुई तो शिक्षक समुदाय लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य होगा।
