उत्तराखंड (देहरादून) 20 जून 2025: प्रदेश शासन ने उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा विभाग में शासनादेश की अनदेखी और नियमों के उल्लंघन के मामले में तत्कालीन निदेशक, प्राविधिक शिक्षा आरपी गुप्ता को दोषी माना है – और उन्हें पद का दुरुपयोग करते हुए नियम – विरुद्ध आदेश जारी करने का दोषी मानते हुए उनकी पेंशन से वेतन वसूली के निर्देश दिए हैं।
सचिव तकनीकी शिक्षा डॉ. रंजीत सिन्हा ने निदेशक, प्राविधिक शिक्षा को निर्देश दिए हैं कि मामले में नियमानुसार तत्काल आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चितकर शासन को जानकारी दें। शासन से मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2021 में शासन ने सुनील कुमार, व्याख्याता (कंप्यूटर साइंस), राजकीय पालीटेक्निक जाखणीधार (टिहरी गढ़वाल) को सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में विशेषज्ञता के चलते वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून में कार्य करने की अनुमति दी थी।
पांच मार्च 2024 को उन्हें विभागाध्यक्ष के पद पर पदोन्नत करते हुए मूल संस्थान राजकीय पॉलिटेक्निक बछेलीखाल, टिहरी में तैनाती दी गई। मगर सात मार्च 2024 को तत्कालीन निदेशक आरपी गुप्ता ने शासन की अनुमति के बिना अपने स्तर से आदेश जारी करते हुए कुमार को दोबारा विश्वविद्यालय भेज दिया। वह 12 मार्च 2024 को वहां योगदान भी कर चुके थे।
शासन के मुताबिक गुप्ता द्वारा बिना आधिकारिक स्वीकृति के आदेश जारी करना उत्तराखंड सरकारी सेवक आचरण नियमावली 2002 के प्रस्तर-3(1)(2) का स्पष्ट उल्लंघन है। तत्कालीन निदेशक, प्राविधिक शिक्षा आरपी गुप्ता के स्पष्टीकरण को असंतोषजनक मानते हुए शासन ने आदेश किया है कि उस अवधि का वेतन उनकी पेंशन से वसूला जाएगा।
