उत्तराखंड (ऋषिकेश) 10 मई 2025: मां गंगा के तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में वीरवार को पावन शिव कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारम्भ हुआ। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष – स्वामी चिदानन्द सरस्वती के सान्निध्य में कथा व्यास राम भारती एवं सन्यास आश्रम, बुलढ़ाना (महाराष्ट्र) से पधारे साधकों ने दीप प्रज्वलित कर शिव कथा की शुरुआत की ।
भगवान शिव के जीवन, तत्त्व, और शिक्षाओं को समर्पित यह कथा आत्म शुद्धि, संयम और सेवा का संदेश देने वाली है। आज की कथा में कथा व्यास श्री भारती ने भगवान शिव के स्वरूप, उनके वैराग्य, करुणा और ब्रह्मज्ञान की महिमा का अद्भुत वर्णन किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘शिव का अर्थ है, कल्याण। शिव कथा का श्रवण जीवन में कल्याणकारी परिवर्तन लाता है। शिव हमें सिखाते हैं कि कैसे हम भीतर के विष (काम, क्रोध, लोभ) को नीलकंठ बनकर धारण करें और समाज के लिए मंगलकारी बनें।’
स्वामी चिदानन्द ने कहा कि भगवान शिव का परिवार विविधता में एकता का अनुपम उदाहरण है। स्वयं शिवजी समाधिस्थ योगी हैं, माता पार्वती गृहस्थ जीवन की आदर्श हैं, भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के प्रतीक हैं तो भगवान कार्तिकेय वीरता और नेतृत्व का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के परिवार में प्रत्येक सदस्य के वाहन भिन्न है। शिवजी का वाहन नंदी बैल और माता पार्वती सिंह पर सवारी करती हैं। गणेश जी मूषक पर और कार्तिकेय जी मोर पर। उन्होंने कहा कि यह प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है कि शक्तिशाली सिंह, सरल बैल, छोटा सा मूषक और मोर सब भिन्न स्वभाव और प्रकृति के प्राणी हैं, परन्तु सभी एक ही छत के नीचे समरसता से रहते हैं। यह शिक्षा देता है कि एकता का मूल आधार प्रेम, स्वीकार्यता और आपसी सम्मान है।
स्वामी चिदानंद ने कथा व्यास भारती को हिमालय की हरित भेंट रूद्राक्ष का पौधा प्रदान कर, अभिनन्दन किया। उल्लेखनीय है कि कथा यजमान चन्द्रशेखर और अनुराधा, महाराष्ट्र पांच दिवसीय शिव कथा, मां गंगा जी की आरती और इस दिव्य परमार्थ आश्रम के दर्शन करा रहे हैं। महाराष्ट्र से आये इस दल में अनेक श्रद्धालु ऐसे हैं जो पहली बार ऋषिकेश की धरती पर आये हैं।
