उत्तराखंड (देहरादून) 20 अगस्त 2025: बैंक के विरूद्ध जिला प्रशासन द्वारा की जा रही कार्यवायी पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। जिलाधिकारी ने एक ऋणी की विधवा के प्रार्थनापत्र पर संज्ञान लेते हुए बैंक के विरूद्ध वसूली आदेश पारित कर दिया था।
बैंक के वकील गौरव शर्मा उर्मिला पत्नी महिपाल सिंह ने जिलाधिकारी को एक प्रार्थना पत्र एचडीएफसी बैंक के विरूद्ध देते हुए अवगत कराया कि उनके पति ने अपने जीवनकल में बैंक से तीन ऋण लिये थे। जिनमें से एक ऋण, इंश्योरेंस प्रिमियम के भुगतान का था लेकिन पति की मृत्यु होने के बाद भी बैंक किश्तों की मांग कर रहा है। जबकि पति की मृत्यु के उपरांत ऋण भुगतान का दायित्व इंश्योरेंस कम्पनी का था। महिला के प्रार्थनापत्र पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने कार्यवायी करते हुए बैंक के खिलाफ वसूली जारी की। ऐसे में बैंक शाखा पर ताला लटकने का खतरा पैदा हो गया। बैंक ने जिला प्रशासन में प्रतिवेदन दिये लेकिन सुनवाई न होते देख बैंक ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जिलाधिकारी के आदेश को चुनौती दी।
बैंक की याचिका की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने जिलाधिकारी के आदेश पर जारी वसूली पर रोक लगा दी है और सरकार से जवाब तलब किया है। बैंक का तर्क था कि इंश्योरेंस कम्पनी की जिम्मेदारी बैंक पर लादकर उसपर अनैतिक कार्यवायी की जा रही है। यदि ऋणी की पत्नी को इंश्योरेंस क्लेम नहीं मिला तो इसके लिये बैंक को कैसे उत्तरदायी बनाया जा सकता है।
